
मां बगलामुखी हवन
मां पीतांबरा की अग्नि साधना—शत्रु स्तम्भन, कोर्ट विजय और विघ्नों का दहन करने वाला विशेष हवन।
मां बगलामुखी हवनमां पीतांबरा की अग्नि साधना—शत्रु स्तम्भन, कोर्ट विजय और विघ्नों का दहन करने वाला विशेष हवन।
मां बगलामुखी हवन संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
बगलामुखी पूजा जहाँ षोडशोपचार और जप प्रधान है, वहीं मां बगलामुखी हवन अग्नि को साक्षी मानकर पीली सरसों, हल्दी, शहद और तिल की आहुतियों से स्तम्भन शक्ति जगाता है। यह चौथी प्रमुख सेवा उन यजमानों के लिए है जिन्हें शीघ्र, तीक्ष्ण और अग्निमय उपाय चाहिए।
मां पीतांबरा बगलामुखी दस महाविद्याओं में वह रूप हैं जो शत्रु की वाणी, षड्यंत्र और झूठे मुकदमे को स्तम्भित करती हैं। हवन में प्रत्येक स्वाहाकार के साथ विघ्न दग्ध होते हैं और यजमान के तेज की वृद्धि होती है।
उज्जैन क्षेत्र तथा नलखेड़ा सिद्ध पीठ पर यह हवन गुरुवार, शनिवार, गुप्त नवरात्रि, अष्टमी और चतुर्दशी को विशेष फलदायी है। पंडित दीपक पंड्या पीत वस्त्र में संकल्प लेकर व्यक्तिगत नाम-गोत्र से आहुति कराते हैं।
विधि में गणेश-गौरी पूजन, पीतांबरा ध्यान, यंत्र स्थापन, पीले कनेर-गेंदे से अर्चन, बगलामुखी मूल मंत्र से 11,000 से 36,000 जप का अंश, फिर विशेष स्तम्भन हवन—पीली सरसों, हल्दी, शहद, तिल, गिलोय और शुद्ध घी की आहुति—होता है। पूर्णाहुति पर कवच पाठ और क्षमा प्रार्थना अनिवार्य है।
यह हवन कोर्ट-कचहरी, व्यापारिक षड्यंत्र, राजनीतिक प्रतिद्वंद्व, नजर दोष, तंत्र बाधा और बार-बार हार की स्थिति में कराया जाता है। पूजा से अलग इसकी पहचान अग्नि में दी गई सतत आहुतियाँ हैं, जो कार्य को शीघ्र गति देती हैं।
अवधि सामान्यतः 3 से 5 घंटे, विशेष अनुष्ठान में एक पूरा दिन हो सकती है। सामूहिक लघु हवन और व्यक्तिगत महाहवन दोनों विकल्प हैं। जो उज्जैन नहीं पहुँच सकते उनके लिए लाइव हवन दर्शन और सिद्ध भस्म-रक्षा सूत्र कूरियर उपलब्ध है।
यजमान पीला वस्त्र धारण करें। काला वस्त्र और हिंसक भाव वर्जित हैं। यह हवन किसी निर्दोष को हानि पहुँचाने के लिए नहीं, अपने ऊपर हो रहे अन्याय को रोकने के लिए है। शुद्ध संकल्प से ही मां प्रसन्न होती हैं।
सामग्री—पीत वस्त्र, हल्दी माला, पीली सरसों, चने की दाल, शहद, गुग्गल, समिधा, ताम्र/रजत यंत्र—पंडित जी की व्यवस्था में रहती है। दक्षिणा पहले बताई जाती है, बीच में छिपी माँग नहीं होती।
हवन के बाद 11 या 21 दिन छोटा पीतांबरा जप, सत्य भाषण और व्यर्थ विवाद से बचने का व्रत फल को बाँधता है। आचार्य दैनिक सरल क्रम लिखकर देते हैं।
कुंडली में राहु-केतु पीड़ा, षष्ठेश-अष्टमेश की क्रूर दशा या शत्रु भाव सक्रिय हो तो यह हवन बगलामुखी पूजा के साथ भी कराया जा सकता है। पहले परामर्श से सही स्तर चुना जाता है।
उज्जैन की अग्नि और मां की पीत कांति मिलकर यजमान के मार्ग के काँटे जलाती हैं। मां बगलामुखी हवन उसी विजय-ज्योति का आह्वान है।
हवन कुंड की दिशा, समिधा की नाप और आहुति की संख्या शास्त्र से बँधी रहती है। मनमानी आहुति नहीं डाली जाती।
यदि केस की तारीख निकट हो तो लघु हवन शीघ्र मुहूर्त में कराया जा सकता है। लंबी साधना बाद में पूरी की जाती है।
यजमान से केवल सत्य विवरण माँगा जाता है—विपक्ष का नाम बदनाम करने के लिए नहीं, अपने संरक्षण के लिए। मां न्याय चाहती हैं, द्वेष नहीं।
हवन की राख का थोड़ा अंश रक्षा के रूप में दिया जाता है। इसे अपवित्र स्थान पर न फेंकें, आचार्य विधि बताते हैं।
पीतांबरा हवन के दिन घर में क्रोध, झूठ और नशा से बचें। अग्नि तब तक साथ देती है जब तक वाणी सात्त्विक रहे।
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